राजस्थान पर्यटक गाइड

तनोट माता मंदिर

User Ratings:

तनोट माता मंदिर या मातेश्वरी तनोट राय मंदिर वही मंदिर है जिसे आपने बॉलीवुड 'बॉर्डर' फिल्म में कई बार देखा है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा भारी गोलीबारी के बावजूद तनोट माता मंदिर अछूता रहा। यह मंदिर भारत पाकिस्तान सीमा के बहुत करीब स्थित है - और पर्यटकों को इस मंदिर से आगे जाने की इजाजत नहीं है।प्राचीनतम चरन साहित्य के अनुसार, तनोट माता, दैवीय देवी हिंगलाज माता का नया रूप है, और तनोट माता को करनी माता बनने के बाद, चरन की देवी के रूप में जाना जाता है।

तनोट माता का इतिहास

देवी तनोट को देवी हिंगलाज़ का अवतार माना जाता है जो बलूचिस्तान के लास्वेला जिले में स्थित है। 847 ईस्वी में तनोट देवी  की नींव, रखी  गयी थी  और मूर्ति स्थापित की गयी थी । पीढीयों से भाटी राजपूत इस मंदिर की देखभाल करते आ रहे  है| इससे पहले 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान, पाकिस्तानी सेना द्वारा लक्षित बम तनोट माता के मंदिर को छू भी नहीं पाए थे और तो और मंदिर के आसपास गिरने वाले बम भी देवी तनोट की दैवीय शक्ती के कारण फूटते नहीं थे । आज भी उन बिना फूटे बमों को तनोट माता मंदिर के  संग्रहालय में देखा जा सकता है।

युद्ध के बाद, भारत की सीमा सुरक्षा बल आज तक इस पवित्र मंदिर का प्रबंधन जारी रखे हुए है। युद्ध्क्षेत्र लोंगो वाल –जैसलमेर के बहुत करीब स्थित होने के कारण, यात्री  मंदिर से आगे  नहीं जा सकते।

गूगल मानचित्र पर तनोट माता मंदिर

तनोट माता मंदिर, जैसलमेर तक कैसे पहुंचें

तनोट माता मंदिर जैसलमेर शहर से 150 किमी की दूरी पर स्थित है और यहाँ केवल  निजी टैक्सी द्वारा जाया जा सकता है जो 2 घंटों का समय लेगी । बीएसएनएल के अलावा कोई भी मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता है, इसलिए सजग रहें तनोत जाने वाली सड़क मीलों तक रेत के टिब्बों और रेत के पहाड़ों से घिरा हुआ है। क्षेत्र का तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है और इस जगह के पर्यटन का आदर्श समय नवंबर से जनवरी तक है।

.

tanot-mata

tanot-mata

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *