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दधिमती माता मन्दिर, नागौर

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दधिमती माता मंदिर उत्तरी भारत का सबसे पुराने जीवित मंदिर माना जाता है। यह मंदिर देवी पार्वती को समर्पित है जिसकी विशेषता यह है कि यह देवी सती (पार्वती) की 52 शक्ति पीठों में से एक है। यह मंदिर राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है। यहाँ भारी संख्या में लोग देवी के दर्शन करने आते है परन्तु नवरात्रि के अवसर यहाँ पर हजारों भक्तों की भीड़ होती है। माना जाता है की यह मंदिर  का निर्माण 4 वीं शताब्दी में गुप्त युग के समय बनाया गया था यह दाधीच ब्राह्मणों का सबसे महत्वपूर्ण और धार्मिक मंदिर माना जाता है इसलिए यहाँ इस मंदिर की कई कहानियां और पौराणिक कथाएं हैं जो इसे और रोचक बनाती हैं। मंदिर के पंडित भक्तों को देवी माता के महत्व और पवित्रता के बारे में भी बताते है।

दधिमती माता का इतिहास

यहाँ  के स्थानीय लोगों द्वारा सुना जा सकता है कि मंदिर देवीमाता माता के नाम से समर्पित है जिसे दधिमती माता के रूप में भी जाना जाता है और इन्होने विक्टासुर नामक एक राक्षस को मारा था। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, दधिमती माता को ऋषि दधिची की बहन माना जाता है, जो वह आकाश मंथन से पैदा हुआ था। मंदिर महामरू वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है जो सफेद संगमरमर द्वारा  बनाया गया है यह मंदिर राजा भोजदेव  द्वारा 836-892 ईस्वी में  बनाया था, लेकिन स्थानीय लोगों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता है कि इस विशाल मंदिर का निर्माण पृथ्वी पर अपने आप ही हुआ था, और देवी माँ की मूर्ति भी ध्वनि के साथ अपने अप स्थापित हो गयी थी जिसने वहन के स्थानीय लोगों और जानवरों को डरा दिया था।

दधिमती माता मन्दिर

दधिमती माता मन्दिर

दधिमती माता मन्दिर, नागौर राजस्थान

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