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अरथुना के मंदिर, राजस्थान

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अरथुना राजस्थान के बांसवाडा जिले में स्थित है एक छोटा शहर है। अर्थुना 11वीं, 12वीं और 15वीं सदी से जुड़े नष्ट हिंदू और जैन मंदिरों के लिए जाना जाता है। यह 11वीं शताब्दी के दौरान वागड के परमारा शासकों की राजधानी थी। उन्होंने एक साथ जैन और शैव धर्मों का संरक्षण किया, जिससे उन्होंने कई शिव मंदिरों का निर्माण किया।

अरथुना में कई प्राचीन मन्दिर और मूर्तियां खुदायी में निकली हैं जिन्हें पुरातात्विक दृष्टि से बेशकीमती एवं दुर्लभ माना जाता है। यहां के मन्दिरों में शैव, वैष्णव, जैन आदि सम्प्रदायों का समन्वय मिलता है।

अरथुना में प्राचीन मण्डलेश्वर शिवालय मुख्य है। इसके अलावा विष्णु, ब्रह्माजी, महावीर आदि की मूर्तियों वाले मन्दिर हैं। यहां के मण्डलेश्वर शिवालय में गर्भगृह सभा मण्डप से काफी नीचे है जिसमें 2 फीट का बडा शिवलिंग है जिसकी जलाधारी तीन फीट गोलाई वाली है। इस मन्दिर का निर्माण दक्षिण भारतीय शैली में हुआ है।

परमारा के राजा चामुंडाराजा के शिलालेख में दर्ज है कि उन्होंने मंदालेसा नमक शिव मंदिर को 1079 ई में अपने पिता के सम्मान में बनाया था| 1080 ई की एक और शिलालेख में बताया गया है कि अनंतपाल नामक उनके अधिकारी बेटे ने भी शिव का मंदिर की स्थापना की थी। हनुमानगढ़ी के रूप में जाना जाने वाले मंदिरों के एक समूह में नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है, अन्य मंदिरों के पास और एक कदम पर कुंड, यहाँ तीन शिव मंदिर हैं। यह स्थान शैवो के लाकुलिसा संप्रदाय के साथ जुड़े थे। हनुमान और विष्णु के मंदिर भी प्रारंभिक काल से जुड़े हुए हैं। भूषण ने 1190 ईस्वी में एक जैन मंदिर का निर्माण किया था। इस जगह पर एक अन्य मंदिर चौंसठ योगिनियों का है।

अरथुना तक कैसे पहुंचे

पुरातत्व और प्राचीन शिल्प-वैभव के लिहाज से महत्वपूर्ण अरथुना के लिए बांसवाडा-अहमदाबाद मार्ग पर बांसवाडा जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर दूर गढी से रास्ता जाता है। गढी से यह आनन्दपुरी मार्ग पर 20 किलोमीटर दूर है।

अरथुना, राजस्थान

अरथुना, राजस्थान

अरथुना के मन्दिर, राजस्थान

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